इतिहास
प्रसाद परिवार वैशाली के महुआ आदलपुर से मुजफ्फरपुर आया था। माता बगलामुखी इस परिवार की कुलदेवी थी और माता की असीम कृपा इस परिवार पर थी। प्रसाद परिवार के मुखिया रूपल प्रसाद वर्तमान में जहाँ मंदिर है, वहां घरेलु रूप से माँ की पूजा करते थे। महंत अजित कुमार बताते हैं कि करीब ढाई सौ वर्ष पूर्व उनके परदादा रूपल प्रसाद ने ही मंदिर की स्थापना की थी। स्थापना के पूर्व रूपल प्रसाद ने कलकत्ता के तांत्रिक भवानी मिश्रा (गया निवासी) से गुरुमंत्र लिया। उन्हीं की प्रेरणा से इसकी स्थापना हुई। मूर्ति का निर्माण कलकत्ता के कारीगरों ने किया।
मंदिर के वर्तमान स्वरुप की नीव वर्ष 1993-94 के बीच महंत अजित कुमार ने रखी। उन्होंने वाम मार्ग व दक्षिण मार्ग से मंदिर में तांत्रिक चेतना जागृत की। धीरे धीरे तांत्रिक शक्तियों के कारण लोगों की आस्था इस मंदिर में बढ़ी और भीड़ जुटने लगी। इस मंदिर में माँ त्रिपुर सुंदरी और माँ तारा की मूर्ति 2004 और बाबा भैरव की मूर्ति 2006 में स्थापित हुई।
कच्ची सराय रोड स्थित माँ बगलामुखी मंदिर जन आस्था का पवित्र केंद्र है। दुखों, संकटों और द्वंदों से मुक्ति के लिए श्रद्धालु आस्था से वशीभूत होकर यहाँ आते हैं और माँ बगलामुखी की पूजन करते हैं। हर गुरुवार को यहाँ काफी भीड़ जुटती है। माता को दही, हल्दी एवं दूभ चढ़ाने से वो प्रसन्न होती हैं।