दिनांक: २८/८/२०२६ | वार: शुक्रवार | माह: अगस्त | हिं.माह: भाद्रपद | तिथि: प्रतिपदा | न: शतभिषा | सू.05:25 AM | सा.06:12 PM
प्राचीन काल
शिवलिंग का प्राकट्य

शिवलिंग का प्राकट्य

मुजफ्फरपुर के गरीब नाथ धाम रोड क्षेत्र, जो कभी घना जंगल था, वहाँ सिद्ध शिवलिंग का प्राकट्य हुआ। मंदिर प्रांगण का कल्पवृक्ष इस प्राकट्य से भी प्राचीन माना जाता है।

1960
कांवर यात्रा की शुरुआत

कांवर यात्रा की शुरुआत

श्रावण मास में कांवरियों द्वारा सोनपुर से गंगाजल लाकर बाबा पर अर्पित करने की तीव्र परंपरा सन 1960 के आस-पास से प्रारंभ हुई।

1960-2000
बिहार का देवघर

बिहार का देवघर

बढ़ती आस्था के साथ बाबा गरीबनाथ धाम 'बिहार का देवघर' कहलाने लगा। बिहार, उत्तर-प्रदेश, मध्य-प्रदेश सहित देश के अनेक प्रांतों एवं नेपाल से भी श्रद्धालु जलाभिषेक के लिए आने लगे।

2006
मंदिर का अधिग्रहण

मंदिर का अधिग्रहण

बिहार राज्य धार्मिक न्यास पार्षद ने मंदिर का अधिग्रहण किया और मंदिर की व्यवस्था के लिए ग्यारह सदस्यों का एक ट्रस्ट बनवाया गया।

2006 के बाद
न्यास समिति द्वारा प्रबंधन

न्यास समिति द्वारा प्रबंधन

न्यास समिति ने मंदिर प्रांगण का विकास, धर्मशालाएं, सेवा शिविर एवं दर्शन व्यवस्था का आधुनिकीकरण किया। मंदिर की पूजा-अर्चना एवं आरतियाँ विधि-विधान से सम्पन्न होने लगीं।

वर्तमान
श्रावणी मेला एवं महाश्रृंगार

श्रावणी मेला एवं महाश्रृंगार

आज श्रावण मास में भव्य श्रावणी मेला, महाश्रृंगार एवं दिन-रात बोल बम का जयघोष गूंजता है। बाबा गरीबनाथ जन-जन की आस्था के प्रमुख केंद्र हैं।

मुख्य तथ्य

कांवर यात्रा सन 1960 के आस-पास से सोनपुर से गंगाजल
अधिग्रहण सन 2006, बिहार राज्य धार्मिक न्यास पार्षद
आराध्य सिद्ध शिवलिंग, बाबा गरीबनाथ