शिवलिंग का प्राकट्य
मुजफ्फरपुर के गरीब नाथ धाम रोड क्षेत्र, जो कभी घना जंगल था, वहाँ सिद्ध शिवलिंग का प्राकट्य हुआ। मंदिर प्रांगण का कल्पवृक्ष इस प्राकट्य से भी प्राचीन माना जाता है।
कांवर यात्रा की शुरुआत
श्रावण मास में कांवरियों द्वारा सोनपुर से गंगाजल लाकर बाबा पर अर्पित करने की तीव्र परंपरा सन 1960 के आस-पास से प्रारंभ हुई।
बिहार का देवघर
बढ़ती आस्था के साथ बाबा गरीबनाथ धाम 'बिहार का देवघर' कहलाने लगा। बिहार, उत्तर-प्रदेश, मध्य-प्रदेश सहित देश के अनेक प्रांतों एवं नेपाल से भी श्रद्धालु जलाभिषेक के लिए आने लगे।
मंदिर का अधिग्रहण
बिहार राज्य धार्मिक न्यास पार्षद ने मंदिर का अधिग्रहण किया और मंदिर की व्यवस्था के लिए ग्यारह सदस्यों का एक ट्रस्ट बनवाया गया।
न्यास समिति द्वारा प्रबंधन
न्यास समिति ने मंदिर प्रांगण का विकास, धर्मशालाएं, सेवा शिविर एवं दर्शन व्यवस्था का आधुनिकीकरण किया। मंदिर की पूजा-अर्चना एवं आरतियाँ विधि-विधान से सम्पन्न होने लगीं।
श्रावणी मेला एवं महाश्रृंगार
आज श्रावण मास में भव्य श्रावणी मेला, महाश्रृंगार एवं दिन-रात बोल बम का जयघोष गूंजता है। बाबा गरीबनाथ जन-जन की आस्था के प्रमुख केंद्र हैं।